
Presents
Suicide
Concept, script & direction - mrityunjay Prabhakar
पहला दृश्य
प्रकाश आने पर सरला और सौरभ मन्च पर दिखते हैं.
सौरभ विभिन्न जगहों की तस्वीरें ले रहा है. एक तस्वीर लेने के बाद सौरभ सरल को दिखाने के लिए तेजी से घुमता है. लेकिन सरला अपने ख्यालों में गुम है. सौरभ चुपके से उसकी ओर बढ़कर उसे चौकाना चाहता है. लेकिन उसके कंधे के पास तक आकर चुपचाप लौट जाता है. सौरभ को सरला की यह मुद्रा पसंद आती है और वह उसकी तस्वीर उतार लेता है. फ़िर भी सरला का ध्यान अपनी ओर न पाकर वह फ़िर से अपने कम मी लग जाता है. आगे बढ़कर नई तस्वीर उतरने लगता है तभी सरला झटके से सौरभ की ओर मुड़कर आवाज देती है. पर सौरभ तबतक अपना स्थान बदल चुका है.
सरला - सौरभ - सौरभ
सौरभ - (काम में व्यस्त) हाँ क्या है.
सरला - क्यों न हम चलकर फिल्मी हस्तियों और सेलेब्रितिज की तस्वीर लेते हैं और उनके ऊपर कोई स्टोरी करते हैं?
सौरभ- मुझे तो खास पसंद नही है पर तुम कहती हो तो चलो.
सरला - आजकल जनता सिर्फ़ बड़े बड़े सितारों और सलेब्रितीस की तस्वीरें ही देखना चाहती है अखबार की बिक्री सिर्फ़ पेज थ्री के कारन ही होती है. आज शाम में ही एक पेज थ्री पार्टी है. वहाँ हमें फिल्मी सितारों का इंटरव्यू लेने का मौका मिलेगा.
सौरभ- चलो, तुम्हारा कहा भी एक बार करके देख लेते हैं.
(दोनों बढ़ते ही फ्रीज़ हो जाते हैं. स्टेज के दूसरे कोने में एक बच्चा एक साहब से भीख मांग रहा है)
भिखारी - दे दो न भैयाजी! एक रूपया दे दो न. सुबह से कुछ नही खाया! बस एक रूपया दे दो. कुछ खा लेंगे.
(साहब कुछ देर उससे बचने की कोशिश करता है फ़िर झुंझलाकर फ़ोन निकलकर बात करने मी मस्गुल होने का दिखाबा करता है.)
साहब- हैलो रामू कहाँ पर हो तुम कितनी देर और लगेगी मैं कब से यहाँ पर खड़ा हूँ. जल्दी गाड़ी लेकर यहाँ पर पहुँचो.
भिखारी- बाबूजी एक रूपया दे दो.....बाबूजी...दो दिनों से भूखा हूँ.......
साहब- हटो जाने कहाँ कहाँ से आ जाते हैं.
भिखारी- अरे बाबूजी दे दो ना......अरे बाबूजी दे दो ना
(साहब उसकी बात का कोई जवाब नही देता और निकल जाता है पीछे पीछे भिखारी भी निकल जाता है.)
सौरभ- (फ्रीज तोड़कर) यार यह सीन काम लायक है. इसे हमारी मैगजीन में जाना चाहिए.
सरला- सौरभ.... इन सब पर टाइम वेस्ट क्यों कर रहे हो....वैसे भी आज के दौर मी इन तस्वीरों को कौन देखना चाहता है.
सौरभ- लोग छापते ही नही हैं तो देखेंगे कहाँ से.
सरला - लोग देखना नही चाहते इसीलिए मिडिया वाले नहीं छापते. सिम्पल सी बात है.
सौरभ - पर मेरे ख्याल से मीडिया वाले अगर छापें तो लोग देखना पसंद करेंगे.
सरला - सब वहम है तुम्हारा. अगर लोग ऐसी चीजें देखना पसंद करते तो इनकी रेटिंग ज्यादा होती न की भुत- प्रेत और सांप वाले कार्यक्रमों की. तुम फिर से शुरू मत हो जाओ.. चलो हमें जल्दी से पार्टी में भी पहुचना है.........
(दोनों चलने लगते है लेकिन जाते जाते सौरभ कहता है)
सौरभ- लेकिन मुझे लगा....... की ये हमारे मैगजीन की कवर स्टोरी बन सकती है.
(दोनों निकल जाते हैं.)
दूसरा दृश्य
(एक पेज थ्री पार्टी का दृश्य. लोग शराब का गिलास लेकर आपस मे मस्ती कर रहे हैं)
(एक कोने मे दो आदमी आपस मे बात कर रहे हैं.)
मि. चड्ढा- हे शैनकी....लॉन्ग टाइम....नो सी..........वेयर आर यू........
शैनकी- बिजनेस के सिलसिले मे बाहर था.
मि. चड्ढा- आज रात को कोई खास प्रोग्राम है तुम्हारा.......
शैनकी- नही .............क्यों?
मि. चड्ढा- तो आज तुम मेरे साथ मेरे घर चलो. तुमसे कुछ खास काम है.....मेरा मतलब है तुमसे कुछ खास बात करनी है..........
(स्टेज के बीच मे दो और आदमी बात कर रहे है)
पहला- तुमने आज की हेड लाइन देखी.
दूसरा- क्या.
पहला- अरे........मि. कुमार क्रिकेट मे पैसा लगा रहे हैं..........
दूसरा- क्यों.
पहला- तुमने क्या देखा नही....शाह रुख खान और प्रीती जिंटा तक क्रिकेट मे पैसा लगा रहे हैं.....यार क्रिकेट मे ही तो पैसा है आजकल.
(दूसरे कोने मे एक महिला खड़ी है तभी दीपिका पादुकोन का अपनी सेक्रेटरी के साथ प्रवेश)
महिला- (उत्साह में आगे बढ़कर) हाय.. दीपिका... लूकिंग रियली कूल.
(महिला दीपिका से गले मिलती है और तीनो आपस में बातें करने लगते हैं. सरला और सौरभ के प्रवेश)
सरला - (आश्चर्य से) लुक सौरभ...पार्टी इस रोकिंग ...एंड लुक ...........दीपिका इस हियर ............आई ऍम गोइंग टू इंटरव्यू हर टुनाईट देफिनेटली..........
सौरभ- आई इवन वोन्ट मिस अ चांस तो टेक हर फोटोग्राफ.......
सरला- लेट्स टॉक टू हर.....
सरला- दीपिका नाइस टू सी यू हियर.....आई वांट टू टेक यौर इंटरव्यू.....
दीपिका - ओके नो प्रोब्लम. कैरी ऑन.
सरला- तो दीपिका जी. पहला सवाल, आपकी आने वाली फिल्मों के नम बताएं.
दीपिका - ओओओओ के .........मेरी एक फ़िल्म जो की रणबीर कपूर के साथ है, जल्द ही रिलीज होने वाली है. यह एक रोमैन्तिक फ़िल्म है जिसमें मैं एकदम नए लुक मे नज़र आउंगी....इसके अलावा मैं एक फ़िल्म और कर रही हूँ....जिसका नाम अभी तक तय नही हुआ है. ये एक सस्पेंस थ्रिल्लर है जिसके बारे मे मैं अभी कुछ नही बता सकती.
सरला- ओके...और आजकल आपके और युवराज सिंह के बारे मे जो ख़बर चर्चा मे है वो कहाँ तक सही है.........की आपके और युवराज की रिश्ते बिगड़ गए हैं?
दीपिका- आई डोंट वांट टू डीसकस माय पर्सनल लाइफ.............
सरला- ओके- सुनाने में टू आया है की रणबीर कपूर से आपके संबंध अच्छे हुए हैं.....
दीपिका- नो कमेन्ट..........
सरला - बस एक सवाल और. अपनी परफेक्ट फिगर का राज बताना चाहेंगी.
दीपिका - नथिंग. जस्ट योग.
सरला - ओके मैम..........दैट इस फाइन.......थैंक्स फार दा इंटरव्यू...........
(सरला एक कोने मे खड़े दो आदमी से बात करती है)
सरला - हैलो.........क्या आप बता सकते हैं..........ये पार्टी किसके लिए दी गई है.............
मि. चड्ढा- ओह यू डोंट नो...............दिस पार्टी इस थ्रों फार जयंती...........मि. देश्मुख्स फेवरिट......
सरला - सौरभ सुना तुमने ..........लेकिन ये जयंती कौन है..........मुझे उसका इंटरव्यू लेना है...........
सौरभ- मैं भी उसकी एक फोटो तो ज़रुर लूँगा.
(तभी मि. देशमुख हाथ मे एक कुत्ता लेकर प्रवेश करते हैं.)
मि. देशमुख - लेडीज एंड जेंटेलमेन कैन आई हैव योर अटेंसन प्लीज..यू विल बी वोंदेरिंग अबाउट फॉर हूम दी पार्टी हैज बीन थ्रोन.........हू इज दी स्टार ऑफ़ टू नाईट .. दी सुस्पेंस इस ओवर..लेडीज एंड जेंटेलमेन..प्लीज वेलकम..विथ अ ह्यूज रौंड ऑफ़ अप्लौज..जयंती...(कुत्ते के सिर पर हाथ फेरता है)...प्लीज हैव अ नाइस टाइम एंड एन्जॉय दी पार्टी... मि. चड्ढा आपका ग्लास खाली क्यों है? वेटर ...
(सीन खत्म होता है)
तीसरा दृश्य
(सरला और सौरभ अपने बॉस के पास जाते हैं जो एक मैगजीन की एडिटर है. एडिटर उनकी तरफ़ ध्यान न देते हुए अपने काम मे व्यस्त है. )
सरला - हैलो मैम....
एडिटर - हैलो
सरला - मैम आज हमने एक बहुत ही इन्तेरेस्टिंग स्टोरी कवर की है. वी हैव बीन टू अ फैबुलस पार्टी.. व्हिच वाज थ्रोन फॉर अ बिच और उस पार्टी मे बहुत सारी फिल्मी हस्तियाँ भी मौजूद थी..हमने दीपिका पदुकोने का एक इंटरव्यू भी लिया है.
एडिटर - ओके ...........सो यू थिंक दैट दिस इज द मोस्ट इनतेरेस्टिंग स्टोरी यु हैव गोट ओन युर फ़िर्स्त वर्किंग डे.
सरला - या मैम.
एडिटर - और तुम्हारा क्या ख्याल है सौरभ.
सौरभ - मैम. उसमें एक गरीब बचे की भी तस्वीर है. आप चाहें तो उसे देख सकती हैं.
(एडिटर फाइल के पन्ने पलट कर देखती है)
एडिटर- ये भिखारी बच्चा भी क्या पार्टी मे था क्या?
सौरभ- नही मैम........ये तो मैंने एक होटल के बाहर से खीचा है...........
एडिटर- अच्छा तो सरला ...एक बात बताओ....तुमने जर्नलिज्म को ही क्यों चुना.........
सरला - क्यूंकि मैम मैं मीडिया के लिए कुछ करना चाहती हूँ........
एडिटर- और तुम्हें लगता है कि इस तरह कि गौसिप ही ख़बर है.
सरला -(कोई जवाब नही दे पाती)
एडिटर- मेरे पास तुम लोगों के लिए एक चैलेंगिंग काम है अगर तुम करना चाहो.
सरला - एस मैम. हम जरूर करना चाहेंगे.
एडिटर - तुमने विदर्भा के बारे में सुना होगा.
सरला - एस मैम.
एडिटर- ओके ...तो लो ये फाइल लो..यही तुम्हारा अगला काम. तुम और सौरभ ..कल सुबह महाराष्ट्र के लिए रवाना हो जाओ और वहाँ जाकर पता करो की किसानों की अक्चुअल हालत क्या है.............इस तरह से तुम मीडिया और समाज के लिए ज्यादा योगदान कर सकोगी........
सरला - ओके मैम...........वी विल ट्राई ऑउर बेस्ट.
(दोनों चले जाते हैं.)
चौथा दृश्य
(गाँव के किनारे के हाइवे का दृश्य. पूरे गाँव के लोग अपने-अपने साजो-समान के साथ सड़क किनारे बैठे हैं. एक व्यक्ति अपनी साईकिल का पहिया धीरे -धीरे घुमाता हुआ नज़र आता है. सरला और सौरभ का प्रवेश.)
सरला - सौरभ ये इतने सारे लोग यहाँ इस तरह अपना समान लेकर क्यों बैठे हैं , और इतने उदास .....और ये देखो लिख रखा है की ये गाँव बिकाऊ है....आखिरकार माजरा क्या है चलो चलकर पूछते है ....भाईसाहब -भाईसाहब आखिर यहाँ हुआ क्या है. ये आप सब यहाँ इस तरह क्यों बैठे हैं.
किसान- क्या बताएं.....अब यही रास्ता बचा है हमारे पास जीने के लिए....आखिरी उम्मीद है हमारी.......दिन रात .सुबह से लेकर शाम तक खून पसीना एक करके भी जिसे दो जून की रोटी नसीब न हो......वो और क्या करेगा ......और भला कर ही क्या सकता है.......देखो इन सबको.....ये सब यहाँ अपना अपना सब कुछ बेचने के लिए लाये हैं ..कोई अपना हल लाया है कोई अपने बैल.....कोई कपडे. बर्तन और ..........सब कुछ.....जो हमारे पास बचा है.......अब तो ख़ुद को बी बेचना पड़ेगा.......जा रहे है ..सब कुछ बेच कर जा रहे है........जा रहे हैं..................
सरला - (एक औरत के पास जाकर) बहन जी.........आप कुछ बता सकती हैं यहाँ पर क्या हुआ है ये सब लोग इस तरह से कहाँ जा रहे है
औरत- क्या कहें....अब कुछ के लिए रह भी क्या गया है.....महाजन का कर्ज चुकाना कहाँ से होता जब कई सालों से फसल ही नही हुई .......महाजन से झगडे होने लगे. गाली गलौज से तंग आकर उसने फंसी लगा ली...अब मैं अकेले बच्चों का पेट कैसे पालूं....जो कुछ मेरे पास बच गया है उसे ही बेचने के लिए यहाँ पर जमा हुए हैं ताकि कुछ दिन की जिंदगी और मिल सके .वरना मुझे और मेरे बच्चों को भी वही करना पड़ेगा जो मेरे पति ने किया....................
सरला - यहाँ ऐसे और कितने परिवार हैं जिसमे किसीने खुद्कुसी की हो?
औरत- यहाँ पर तो हर दिन ही किसी न किसी घर से रोने की आवाज़ आती ही रहती है...हर दिन ही.......अभी पास ही के गाँव के प्रभाकर राव ने भी फांसी लगाकर जान दे दी..कोई एक हो तो बताएं . यहाँ तो हर घर कि यही कहानी है. हर तरफ़ अजीब सी मुर्दा शान्ति छाई है.
सरला - ये प्रभाकर राव जी का घर किस तरफ़ है ?
औरत- ये जो पगडंडी है ..इस पर सीधे चले जाने से सामने ही बगल मे उसका घर पड़ेगा.......
सरला - अच्छा तो हम चलते हैं ..(आगे एक और आदमी से सवाल करती है) .भाईसाहब ....क्या आप.......
(लेकिन वह किसान गुस्से में साईकिल का पहिया तेजी से घुमाने लगता है. सरला और सौरभ हैरानी से देखते हुए निकल जाते हैं.)
पांचवां दृश्य
(श्याम राव कटाले के घर का दृश्य. श्याम राव खांस रहे हैं. पास में ही उनकी बहु बैठी है पर खोई हुई सी है. श्याम राव की पत्नी आती है. बहु -बहु की आवाज़ देती है पर बहु सुनती नहीं बस खोई रहती है. फ़िर वह बेटी को आवाज़ देती है की पानी दे जाए. बेटी मंजू पानी लेकर आती है. श्याम राव पानी पीते हैं. तभी दरवाजे पर थक-थक की आवाज होती है. मंजू जाकर देखती है. मंजू दरवाजा खोलती है.)
सरला- जी हम पत्रकार हैं दिल्ली से आये हैं. श्याम राव जी से कुछ बात करना चाहते हैं.
मंजू - (अन्दर आकर) पापा कुछ पत्रकार लोग आये हैं. आपसे बात करना चाहते हैं.
(श्याम राव हाथ के इशारे से उन्हें अन्दर बुलाने को कहता है.)
सरला - (अन्दर आकर) जी मेरा नाम सरला है और ये मेरे सहकर्मी हैं सौरभ. हम दिल्ली से आये हैं. आपसे कुछ बात करना चाहते हैं.
(श्याम राव हाथ के इशारे से उन्हें पूछने को कहता है)
सरला - आपके पास कुल कितने एकड़ जमीन होगी.
श्याम राव - यही कोई १० एकड़ होगी.
सरला - खेती से आमदनी कितनी है.
श्याम राव - एक वक्त था जब खाने कमाने भर हो जाया करती थी पर अब तो दो वक्त की रोटी जुगाडाना भी मुश्किल है. खेती से अगर फायदा होता तो मेरा बेटा आत्महत्या ही क्यों करता.
सरला - जी मैं यही जानना चाहती थी आपके बेटे ने आत्महत्या क्यों की?
(बहु प्रभाकर राव की बात सुनकर जोर से रोने लगाती है और उठकर भाग जाती है)
श्याम राव - दिन भर हाड़-तोड़ परिश्रम करता था मेरा बेटा. फ़िर भी दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया था. ऊपर से कर्ज का बोझ बढ़ता ही गया. साल दर साल फसल बर्बाद होती रही और कर्ज चढ़ता गया. जब स्थिति हाथ से निकल गई तो क्या करता. (रोने -रोने को हो जाता है)
सरला - इस हादसे के बाद सरकार की और से कोई मुआवजा मिला.
श्याम राव - जिसका बेटा मरा हो. उसका मुआवजे से भरपाई हो पायेगी क्या. (रोने लगता है)
(अन्दर से बहु के जोर-जोर से रोने की आवाज़ आती रहती है)
सरला - श्याम राव जी आखिरी सवाल. अब परिवार का गुजरा कैसे चल रहा है.
श्याम राव - (रोते हुए) चलना क्या है. घर के सामान बेचकर गुजरा कर रहे हैं. जब यह भी खत्म हो जायेंगे, तो फ़िर भगवान ही मालिक है.
सरला- अच ठीक है. हम अभी चलते हैं. जरूरत पड़ी तो फ़िर आएंगे.
(दोनों निकल जाते हैं. रोने की आवाज़ कुछ देर तक आती रहती है)
छठा दृश्य
(इस दृश्य में मंच के एक कोने में पी. साइनाथ लेक्चर देते हुए दिखाई पड़ते हैं. साथ-साथ महारास्त्र विधानसभा का दृश्य भी चलता रहता है)
पी.साईनाथ - साथियों. आज जिस विषय पर बात करने के लिए हम सब यहाँ जमा हुए हैं - वह वास्तव में एक गंभीर विषय है. एक ज्वलंत मुद्दा है...जिस पर मेरा मानना है कि बात करना बहुत ही जरूरी है. बहस करना बहुत जरुरी है क्यूंकि भारत में अब तक इस विषय पर उतनी बहस नही हुई है जितनी कि होनी चाहिए थी. हम आप सभी जानते हैं कि किसी भी लोकतंत्र को बनाये रखने के लिए बहस एक जरूरी माध्यम है. लेकिन भारत में जो बहस करने का जो माध्यम है मीडिया...चाहे वह प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रोनिक मीडिया ..आप अखबार पढ़ते है आप न्यूज़ सुनते है क्या आप नहीं पाते की आज के समय में मीडिया बायस हो चुकी है वो सिर्फ उस भारत की तस्वीर दिखाती है जिसमे कुछ बिजनस मैन आते है कुछ फिल्म स्टार या फिर कुछ क्रिकेटर आते है ..कोई भी उस भारत की तस्वीर दिखाने की कोशिश भी नही करता जो फुटपाथ पर सोता है, जो भुखमरी का शिकार है. मेरा कहना यह है की मीडिया जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी कहा जाता है अपनी भूमिका निभाने में पूरी तरह नाकाम रही है .
(विधानसभा का दृश्य प्रकाशित होता है.)
एक विधायक - माननिये सभा पति महोदय..मैं आपके मध्यम से मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूँ की मेरे क्षेत्र से आए दिन आत्महत्या की ख़बर आती रहती है...किसान दिन पर दिन आत्म हत्या किए जा रहे है ....किसान पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है ..और सरकार चैन कि नींद सो रही है ...मैं जानना चाहता हूँ कि आख़िर सरकार इसके लिए क्या कर रही है .सरकार ने किसानों की दशा सुधारने के लिए अब तक क्या किया है? सभापति महोदय ..अगर किसानों के प्रति ये लापरवाही ख़त्म नहीं की गई और आत्महत्या का ये सिलसिला ख़त्म नहीं किया गया तो मैं भी एक दिन इसी सभा में सबके सामने आत्मदाह कर लूंगा.
मंत्री - माननीय अध्यक्ष महोदय, लगता है माननिये सदस्य महोदय इस बात को लेकर कुछ ज्यादा ही भावुक हो रहे है ....मैं सदन